केरलाफार्मरऑनलाइन.कॉम विविध भाषाई ब्लोग किसानों केलिये एक किसान प्रसारित कर रहा हूँ
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    एक आसान तरीका ट्विट्टर में प्रसारित मैक्रो ब्लोग से समाचार पत्र शैली के रूप में पढ़ने के लिंये आयोजित किया हैं। समाचार पत्र किसी भी ट्विट्टर उपयोगकर्ता, सूची # या टैग के लिए बनाया जा सकता है।

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  • देशाभिमानि समाचार पत्र से अलावा और किसी पत्र में यह समाचार प्रसारित नहीं।
    इस साल एप्रिल से लेकर स्वाभाविक रबड् अन्तरराष्ट्रीय भाव से 36 रुपये तक ऊँचा रखकर टयरों के निर्यात करनेवाला एक निर्माता को निर्यात के अनुपात पर निश्चित मात्रा के स्वाभाविक रबड् 0% आयात शुल्क में आयात कर सकते हैं। इस सौलियक से एम.आर.एफ को 30 रु तक का फायदा होगा जो अन्य निर्माता को नहीं मिलेगा। इसी के साथ आर.एस.एस 4 और मनोरमा समाचार पत्र में प्रसारित करनेवाला व्यापारी भाव में अन्तर 3 रु तक कम रखकर बाजार से दूर भी रह सकते हैं। इस कारवाई से एम.आर.एफ के मुनाफा और अन्य निर्माताओं के नुकसान अन्ताज कर सकते हैं। रबड् बोर्ड के चरित्र में आज तकके सबसे बडा भंडार प्रसारित करते समय निर्माताओं को रबड् नहीं मिलता करके एक लाख टण स्वाभाविक रबड् 7.5 % आयात शुल्क में आयात करने की अवसर दूँगा करके मन्त्री महोदय ने निर्णय लिया। बाद में इसी का कई रूप धारण हुआ। अगस्ट महीने में चार ग्रेड रबड् और व्यापारी दाम में अंतर 21 रुपये तक बडाकर उसी का पूरा भायदा सिर्फ एम.आर.एफ ही उठा सकते हैं। क्यों की दृष्टी पर आधारित ग्रेडिंग के परदे के बीच छोटे व्यापारियों से आरएसएस १ के षीट सिर्फ एम.आर.एफ को कम दाम में इकटा करने का सौलियत मौजूद हैं। इसके सिवा अब 92% उतपादन केरल का होते हुये भी तीन लोड आयात की गई रबड् तमिलनाड से केरल में नमक के ट्रकों पर लाने का कोशिश की हैं। मलयालम में रेडियो, टी.वी, और समाचार पत्र चलाने वाला इनको अनगिनत रिपोरटर (Reporters) भी मदद केलिसे मौजूद हैं। इस हालात में इनें सबसे बडा निर्माता रहकर अन्य निरमाताओं को बरबाद भी कर सकते हैं।
    रबड् बोर्ड के आँकडे प्रसारित करनेकेलिये कुच्छ आँकडे आटो टयर मानुपेक्चेर्स असोसियेषन से इकटा करते हैं। इस खेल से और हेराफेरी और तेज करने में सफल होजाता हैं। एम.आर.एफ को देखकर सलाम करनेवाला रबड् बोर्ड एक गुलाम का काम कर रहे हैं। किसानों से इनके (मनोरमा और रबड् बोर्ड) जाली स्नेह हम को समझ में आना जरूरी हैं। ऊँचे दाम से गिरते समय व्यापारियों को फायदा बहूत हैं। क्यों कि आज के रकम के अनुसार खरीद के आदेश मिलने पर एक ङफ्ते के अंदर १६ टण के ट्रक भेजना हैं। उसी वजह से इसके बीच जितना दाम गिरा सकते हैं उतना मुनाफा हो जाता हैं। रबड् बोर्ड, बडे व्यापारी और बडे निर्माता मिलकर च्छोटे व्यापारियों, कियानों, अन्य निर्माताओं को लूटता हैं।

    आप भी सोचिये एक निर्माता स्वाभाविक रबड के दाम के नियन्त्रण अपने हाथ में रखना उचित हैं?

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  • Adv Shine's old post through search as resultsअब मलयालम ब्लोग में ताजा समाचार यह हैं। जोर्ज जोसफ नाम के (एक रिटयेर्ड हेडमास्टर) नकली ब्लोगर प्रोफैल बनाकर पहले के जमाने में नायर जात के सारे औरतें वेश्याये (रण्डी)थी करके स्थापित करनेकेलिये कई पोस्ट लिखी। इसके खिलाफ नायर सर्वीस सोसैटी के सेक्रटरी ने डी.जी.पी को एक खत दिया। उसके परिणाम सैबर सेल ने गूगिल से कम्पूटर के ऐ.पी नंपर प्राप्त करके अड्वकेट षैन को गिरफतार की और उससे पहले ही उसने हैकोर्ट से जमानत ली थी। कुच्छ महीने पहले सन्तोष नाम के एक ब्लोगर ने सेबर सेल से य़ह पूछा था “किसी ब्लोगर नफ्रत की बात (hate speech)” प्रसारित किया है करके नजर में आया कि नहीं। यह बात किसी समाचार पत्र में नहीं आया था। लेकिन कुच्छ दिनों बाद साथ के ब्लोगरों ने उस चित्रकार (Artist) के सही नाम मुरली थे, उनके गिरफतारी के बारे में पोस्ट लिखी और कुच्छ समाचार पत्रों में भी छापा। उस कारण अन्य ब्लोगरों को भी मालूम पडा। उस समय कुच्छ महीने केलिये चित्रकार के ब्लोग आमन्त्रित व्यक्तियों केलिये खुला था। ऐसे ही अब अड्वकेट षैन का भी ब्लोग आमन्त्रित व्यक्तियों केलिये खुला हैं। कुच्छ महीने बाद चित्रकार के ब्लोग के ऊपर और नीचे उशका खूद का लिखी सूचना प्रसारित करके कुच्छ गंदे पोस्टों को निकालकर अधिक शक्ती के साथ नायर जाती और ब्राह्मिण के बारे में नफ्रत की बातें प्रसारित कर रहे हैं। अब यही चित्रकार गिरफतार किया हुआ षैन के मदद की पोस्ट प्रसारित कर रहे हैं।

    नायर समुदाय के सारे स्त्रीयें वेश्यायें करके स्थापित करने केलिये छापे किताबें (हमें मालूम हैं कितने साल हुये छापना शुरू हुआ करके)  और इन्टेर नेट से सेर्च करके (वह शुरू होकर कुच्छ साल ही हुआ हैं) सपूत शामिल कर रहे हैं जो गलत हैं। तीस या चलीस उम्र के लोग ऐसे पुराने जमाने के चरित्र प्रसारित कर रहे हैं जो आँखें देखे जैसे। सैबर आक्ट 2008 के बदलाव के चर्चा के समय हमारे पारलमेन्ट में विरोधि दल हंगामा मचा रहे थे। उसी वजह से नये बदलाव किसी चर्चा के बगैर ही काम में लाया गया।

    ज्योर्ज जोसफ जो एक रिटयेर्ड अध्यापक नाम कृस्टियन नाम हैं उस नाम को अन्य समुदाय के व्यक्ति ओक वकील इस्टेमाल करने पर जरूर आश्चर्य होता हैं। अब विचित्रकेरलम ब्लोग देखने पर ऐसे नजर आयेगा।

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    ज्योर्ज जोसफ बदलकर  शंखघवरयन और उसके बाद  जी.जे बनकर गलती से मुक्त होने का प्रयास हो रहा हैं। कुच्छ दिनों बार फिर से यह ब्लोग प्रसारित होने का उमीद हैं। आज तक हम ऐसे ही देखा हैं। अभी भी कुच्छ पोस्ट गूगिल संभाल कर रखा हुआ देख सकते हैं।  सेभालकर रखाहुआ ब्लोग और कुच्छ दिनों देख पायेगा।

    सेवा की शर्तें | गोपनीयता | सामग्री नीति हर ब्लोगर पढना चाहिये।

    दूसरों की पहचान धारण करना: कृपया कोई अन्य व्यक्ति या किसी संगठन का प्रतिनिधि बनकर, जो कि आप नहीं हैं, अपने पाठकों को न भटकाएं या उन्हें भ्रमित न करें. हम यह नहीं कर रहे कि आप पैरोडी या व्यंग्य प्रकाशित नहीं कर सकते – बस ऐसी सामग्री से बचें जो संभवत: आपके पाठकों को आपकी वास्तविक पहचान की ग़लत जानकारी दे.

    ऐसे ब्लोग का लक्ष्य वर्गीयता के बढावा देना और आपस में लडने को तैय्यार करना ही हैं। एन.एस.एस के जनरल सेक्रटरी के शिकायत के कारण कारवाई हुआ और गिरफ्तारी होकर जो व्यक्ती एन.एस.एस से दूर चले गये व्यक्तियों को फिरसे शामिल कराकर संघटन के ताकत बडेगा। ऐसे होने पर अन्य जातियों का भी ताकत बडेगा। सारे राष्ट्रीय पारटियों के लक्ष्य भी वही हैं। आनेवाली पंचायती चुनाव में भायदा उढाने की एक पहली कदम होगा यह कारवाई।

    ऐसे अवस्था में तैय्यारी क्यों करना पडा जरा सोचने की बात हैं। श्री मनमोहन सिंह के इरादे की कारण शशी थरूर तिरुवनन्तपुरम लोकसभा चुनाव में एक लाख तक वोटें ज्यादा पाकर सबको हराण करदी थी। इतना ज्यादा मत वर्गीयता और पार्टी के अतीत सोचने वाले जनता के निर्णय का परिणाम हैं। कोणग्रस और अन्य पार्टी के लोगों को यह वात हजम होनेवाला नहीं था। उसका सपूत हम कई बार देख चुके हैं। थरूर नायर नहीं हैं करके एन.एस.एस के जनरल सेक्रटरी नारायण पणिक्कर  बोलने का कोई असर मत में दिखाई नहीं दी।

    कई सालों से सैबर सेल में सिन्धू जोय (सी.पी.एम), पिणराई (सी.पी.एम) और नारायण पणिक्कर के शिकायत के सिवा और क्या असर हम को दिखाई दी? इसका जवाब दस रुपये का कोर्ट फी स्टांप छिपाकर सैबर सेल के पब्लिक इनफरमेषन ओफीसर को समर्पित करके यह बात के पता करना चाहिये।

    घृणा फैलाने वाले वक्तव्य: हम ब्लॉगर का उपयोग आपके विचारों की अभिव्यक्ति के लिए करना चाहते हैं, भले ही वह अत्यधिक विवादास्पद क्यों न हो. परंतु, घृणा फैलाने वाले वक्तव्य प्रकाशित करके इस सीमा को पार न करें. इससे हमारा तात्पर्य ऐसी सामग्री से है जो वंश, नस्ल, धर्म, अक्षमता, लिंग, आयु, वरिष्ठता की स्थिति या यौन रुझान/लैंगिक पहचान के आधार पर घृणा या हिंसा फैलाती है. उदाहरण के लिए, ब्लॉग में ऐसा न लिखें कि X नस्ल वाले लोग अपराधी हैं या वे Y धर्म का पालन करने वालों के प्रति हिंसा का समर्थन करते हैं.

    गूगिल और ब्लोगर के बीच कुच्छ भी छुपा नहीं हैं। लेकिन अंजान ब्लोगर को पकडने केलिये भारत सरक्कार तथा राज्य सरकार को गूगिल के सहारा लेना पडता हैं।  ऐसे अवस्था में गूगिल के नियमो के पालन कैसे होगा

    सही उपयोग. आप यह स्वीकार करते हैं कि इस सेवा का अपने लिए उपयोग करने, आपके किसी भी संदेश, और उनके परिणामों के लिए आप स्वयं ज़िम्मेदार हैं. आप यह स्वीकार करते हैं कि आप इस सेवा का उपयोग आपके देश से निर्यातित तकनीकी डेटा के प्रेषण संबंधी किसी भी कानून और अमेरिकी निर्यात नियंत्रण कानूनों समेत विद्यमान सभी स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों, नियमों और विनियमनों के अनुसार करेंगे

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  • वर्ष 2009-10 में उत्पादन घटा

    देश में प्राकृतिक रबर के उत्पादन में 2009-10 के दौरान 3.8 प्रतिशत की गिरावट आई है।

    कुल उत्पादन पिछले वित्त वर्ष के 8,64,500 टन से घटकर 8,31,400 टन रह गया है। वहीं रबर की खपत में 6.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 8,71,720 टन से बढ़कर 9,30,565 टन हो गया है। इससे पिछले 3-4 साल से इस जिंस की मांग आपूर्ति के बीच में अंतर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

    रबर बोर्ड के मुताबिक 2009-10 के दौरान पिछले साल की तुलना में रबर की खपत में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह टायर क्षेत्र से बढ़ी हुई मांग है। सीएट, जेके और ब्रिजस्टोन टायर ने उत्पादन क्षमता में विस्तार किया है। साथ ही बिड़ला, अपोलो और टीवीएस श्रीचक्र टायर ने नए संयंत्र स्थापित किए हैं।

    बोर्ड का यह भी मानना है कि चालू वित्त वर्ष में भी यही स्थिति बनी रहेगी, जिससे रबर की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर और बढ़ेगा। बोर्ड के आरंभिक अनुमानों के मुताबिक देश में 31 मार्च तक रबर का कुल स्टॉक 2,48,000 टन था, जबकि पिछले साल की समान अवधि में रबर का स्टॉक 1,96,230 (सही संख्या ऊपर चित्र में देख सकते हैं।) टन था। लेकिन बोर्ड के यह आंकड़े स्थानीय बाजार की धारणा से मेल नहीं खाते।

    आभार – बिजनेस स्टैंडर्ड

    आँकडे की विश्लेषण स्प्रेडषीटों पर

    इन स्प्रेडषीटों पर प्रसारित आँकडे की विश्लेषण और कहीं नहीं मिलेगा।

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  • 11 बजे से लेकर तिरुवनन्तपुरम पालयम से बी.टी बैंगन को रोकने केलिये जो उपवास हो रहा हैं उसका ताजा समाचार प्रसारित करूँगा। अंग्रेजी और मलयालम में समाचार मौजूद हैं। अंग्रेजि को अगर कोइ हिन्दी में बदलकर मदद करेगा तो अच्छा होगा।

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