“Adwaidam”,
Nr.Theroth Kavu,
Kakkad, Kannur-670 005
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If you are using Twitter and Firefox then you can follow Dr. Shashi Tharoor with quick time updates which a MP can do for transparency of his service.

]भारत में ऐसे कितने एम.पी होगा जो जीतने के बाद जनता से मिलाप रखते हैं? हो सकता है सिर्फ एक व्यक्ती शशी थरूर होगा। ए.ऐ.सी.सी, के.पी.सी.सी और प्रादेशिक संविधान एम.पी और मन्त्रियों को कार्य निर्वहण केलियो मदद करनेवाला होना चाहिये। बल्की केरल जैसे देश में कार्य निरवहण पार्टी सेक्रटेरियट और पोलिटब्यूरो के नियंत्रण में हैं। उसकी परिणाम हम 2009 के मतदान से प्राप्त की गई नतीजे से मालूम कर सकते हैं। कुच्छ लोगों के निर्णय आम जनता के खिलाफ होने का सपूत था पार्टी के बीच के अंत्रोणी झगडे, जनता दल जैसे पार्टी शुरू से उनके साथ थे उनको बाहर धकेलना, धर्मनिरपेक्ष बोलकर पि.डि.पी को प्रचारण के सदस्य बनाना, लावलिन हेराफेरी से पिणराइ विजयन को बचाने केलिये अडवकेट जनरल के मदद लेना आदी इस चुनाव में यू.पी.ए को गुणदायक बन गया। जनता या जाती, मत तथा कक्षि राष्ट्रीयता से मुक्त मतदाताओं को खिलाफ बनाने का पूरा जिम्मेदारी पिणराइ विजयन का ही हैं।
तिरुवनन्तपुरम के उमीदवार डो शशी थरूर और उसे मौका देने केलिये कोण्ग्रस के नेतृत्व के निर्णय एक लाख तक के ज्यादा मतदान हासिल करके एक बडिया कमाल करके दिखाया। चुनाव के सारे खर्चे थरूर के कमाई से ही किया। उनके ऐसे जीत के प्रधान कारण उन्होंने जो महत्वपूर्ण वादा जनता के सामने रखा था इसलिये हैँ। शुरी से उन्होंने यह बताया कि वे एक विभिन्न स्वभाव के एम.पी होगा और जीतने के बाद जनता से मिलाप रखूँगा मलयालम लिखने नहीं आता तो भी समझ सकते हैं और उन बातों को आंग्रेजी और हिन्दी में दिल्ली में समर्पित करूँगा। शुरू में ही उन्होंने जो मतदाताओं को उमीदवार के पहचान करानेवाला पोस्टर और बानर लगाया हुआ था उनको निकालकर एक साफ शहर कायम रखने का काम में शामिल हुये। साथ ही आम जनता से संपर्क रखने केलिये संविधान के रूप का निर्माम खोषित की जो पार्टियों से मुक्त व्यक्ती हर दिन दो खंडे का अवसर प्रदान करूँगा। नेट में दुनिया के किसी भी कोने से उनको ट्विट्टर में सन्देश प्राप्त कर सकते है उनके पीछे करने पर। इसी को जनहित बोल सकते हैं। भारत में ऐसे कितने नेता होंगे अधिकार प्राप्त होने के बाद आम जनता से मिलाप रखना चाहते हैं?
आजतक जो अधिकार संभाले लोगों में अधिक लोग हेराभेरी में शामिल थे। राहुल गान्धी जैसे युव और सीथे साथे व्यक्ती मंत्री के पद संभालना भी एक शुभ सूचना हैं। भारत केलिये कामकरनेवाला एक सामूहिक नेटवर्क इन्डी पेपल में थरूर के हाजरी उन्हें और महत्वपूर्ण बना रहे हैं। डो. थरूर के ब्लोग पढने और अभिप्राय लिखनेका अवसर भी प्राप्त हैं। सारे भारत के बारे में विशाल जानकारी भी वह सैट दे रहे हैं।
झीतने के बाद हर एम.पी उस प्रदेस के पूरे जनता के प्रतिनिधित्व करनेवाला बनजाता हैं। उसे काम में लाने केलिये जनता से मिलाप रखने का संविधान किसी स्वतंत्र व्यक्ती के जरीये होना चाहिये। शशी थरूर के तरफ से ऐसे ही वादा को काम में लाने की कोशिश देख सकते हैं। इस चुनाव से पहले थरूर के एन.आर.ऐ दोस्त के जरीये मुलाकात करने केलिये हम तिरुवनन्तपुरम के कुच्छ ब्लोगर उन के खर पहूँचे थे। लेकि एक नेता वहाँ जो मौजूद थे उन्होंने मुलाकात का मौका देने से इनकार किया और हम को आदेश दी तम्पानूर रवी के जरिये ही आना चाहिये। लेकिन थरूर ने हमें मुलाकात के कुच्छ वक्त जरूर दी। इस का साफ मतलब यह था सारे नियंत्रण इन च्छोटे नेताओं के हाथ में निरभर थे। उन्हें मालूम नहीं होगा जो थरूर को एक लाख तक मत ज्यादा मिला स्वतंत्र मतदाताओं से ही हैं।
जो व्यक्तिगत नहीं और आम जनता केलिये गुण पानेवाला समस्याओं को एम.पी के पास पहूँचाने के बीच इन चमलों के धकेल से सावधान रहना होगा। ऐसे गलत तरीके का मुक्ती डो. थरूर के पास होगा तो उससे अच्छा और कौन सा बात हो सकते हैं आम जनता केलिये।
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डो. शशी तरूर ने 99998 ज्यादा वोटों से जीतकर तिरुवनन्तपुरम के नाम रोषण कर दी। हमारे हार्दिक मुबारक हो।

मलयालम ब्लोग के बीच ऐसे एक ब्लोग चित्रकारन नाम पर प्रसारित हैं। उनके सभी पोस्टों में ब्राह्मिण और नायर समुदाय के खिलाफ ऐसे लेख प्रस्तुत करते जा रहे हैं। ऐसे गंचे शब्दों के इस्तेमाल के वजह से किसी दूसरे के पोस्टों में इस चित्रकारन के कमेन्ट मना करते थे या निकाल देते थे। यह व्यक्ती ईऴव समुदाय के हैं। परंतू किसी भी ऊँचे समुदाय के व्यक्ती कभी भी इस यमुदाय के खिलाफ चित्रकारन के जैसे लेख कभी भी प्रसारित नहीं की।
कुच्छ महीने पहले इस व्यक्ती ने सारे मलयाली को बेवकूफ बनाकर एक नये तरीके अपनाया। वह यह था नये ब्लोगरों के सहायता केलिये केरल ब्लोग अकादमी और उसके कई शाखायें कई जिले में ब्लोग नाम से शुरू की। उन तमाम ब्लोगों में इस व्यक्ती के गंदे ब्लोग लिंग भी शामिल की थी। जब तिरुवनन्तपुरम जिले में यह शिल्पशाला ङुआ था तब इस व्यक्ती के काले मुह को दुनिया के सामने लाने में मैं कामयाप हुआ था। उसके बाद मेरे खिलाफ ऐसे गंदे धब्द सहित मेरे खिलाफ कई पोस्ट लिखे थे। इस व्यक्ती ने जो करवाई शुरू की उसका नकीजा ङम मुंबई में देख रहे हैं वही होगा। उसलिये भाईचारा और शांति कायम रखने केलिये मुझे यह पोस्ट डालना पड रहा हैं। जरूर कुच्छ साल बाद जब मलयालम को हिन्दी में बदलकर पढने की सुविधा गूगिल प्रदान करेगा तब आप लोगों को इस मुरली नाम के चित्रकारन से असली रूप नजर आयेगा।
मैं ने अपने पहचान बताकर पोस्ट लिखता हूँ। उसी वजह से मेरा लेख गंदी बातें या समुदाय को प्रकोपित करने वाला एक लफ्स भी नहीं होगा। जब तिरुवनन्तपुरम में शिल्पशाला हुआ था तब मैं ने इस मुरली को मेरा विसिटिंग कारड दिया उसके बदले में उसने भी गलती से उसका कार्ड मुझे दी। उस दिन से ब्लोग में यह अन्जान व्यक्ती चित्रकारन पहचानवाले हो चुके हैं।
01-11-08 को एस.एन.एच.एस.एस उऴमलक्कल नाम के एक मलयालम ब्लोग उस स्कूल के प्रिनसिपल ने प्रसारित की। केरल के 52 वाँ सालगिरा के दौराण यह समारोह आयोजित की थी। जब मैं उधर पहूँचा मुझे केरल स्कूल डोट निंग डोट कोम नाम की एक वेब सैट सामूहि गडबंधन का प्रसारित कर सका। उस सैट पर अन्य क्सूलें शामिल हो सकता हैं। मुझे उस समारोह पर इसलिये बुलायाथा कि छात्रों को यह सिखाना था कैसे विविध भाषाओं में ब्लोग प्रसारित कर सकते हैं। छात्रों के लेख प्रसारित करके उनके काबिलियत बठाने का प्रयास ब्लोग के जरिये शुरू की।

श्रीमति रंजना भाटिया
मेरे बारे में एक पोस्ट हिन्दी मीडिया में लिखकर एक मलयाली के बारे में हिन्दी ब्लोगरों के बीच जान पहचान कराने में श्रीमति रंजना भाटिया काम्याप हो चुके हैं। इन्होंने कुच्छ दिन पहले एक ई-मेल मुझे लिखी थी।
नमस्ते ..
कई दिन से आपका ब्लॉग पढ़ रही थी …कुछ प्रश्न जानने की उत्सुकता है …क्या आप हिन्दी समझ सकते हैं ..यदि हाँ ..तो मेरे कुछ प्रश्न है …
उनकी प्रश्नों के उत्तर मैं ने भेजा था।
यह कवयित्री रंजना भाटिया जिनकी जन्म हरियाणा के रोहतक ज़िले के कलनौर गाँव में १४ अप्रैल,१९६६ को हुआ। आरम्भिक शिक्षा दिल्ली में और कॉलेज जम्मू से किया। इन्होंने बी॰एड॰ तक की शिक्षा ली है। बचपन से ही लिखने में रुचि थी। कई लेख और कविता शुरू में दैनिक जागरण, अमर उजाला और भाटिया प्रकाश [मासिक पत्रिका] आदि में छपे, फिर घर में व्यस्त होने के कारण लिखना सिर्फ़ डायरी तक सीमित रह गया। सैकड़ों कविता लिखी हुई हैं। १२ साल तक स्कूल में अध्यपिका रहीं। पत्रकारिता में ली गई डिप्लोमा की डिग्री बहुत काम आई। लगभग दो वर्षों तक मधुबन पब्लिशर के साथ जुड़ी रहीं जहाँ इन्हें उपन्यास सम्राट प्रेमचंद के उपन्यासों की प्रूफ़-रीडिंग और एडीटिंग का अनुभव प्राप्त हुआ। फ़िलहाल घर में हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं। अब कुछ समय से नेट में कई फ़ोरम में लिखती हैं। कविता और हिंदी-साहित्य में विशेष रुचि है। बच्चन ,अमृता प्रीतम और दुष्यंत जी को पढ़ना बहुत पसंद है।
Courtesy – मेरे बारे में
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